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उपचुनावों में अधिकतर ‘फेल’ हो जाती है बीजेपी

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नई दिल्ली: यूपी के गोरखपुर, फूलपुर और बिहार के अररिया लोकसभा उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है. गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा की सीटें बीजेपी के लिए उसकी नाक का सवाल हैं. राजनीतिक गणितज्ञों को भले ही इन दोनों सीटों पर बीजेपी का पलड़ा भारी लग रहा है लेकिन आकड़ें कहते हैं कि उपचुनावों में बीजेपी अक्सर हार जाती है.

हम ऐसा सिर्फ राजस्थान के परिणाम को देखकर ही नहीं कह रहे हैं. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछले चार सालों में हुए लोकसभा उपचुनावों में बीजेपी की जीत का प्रतिशत कम ही रहा है.

….सिर्फ राजस्थान ही नहीं यहां भी हारी है बीजेपी

राजस्थान में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी हार गयी थी. अधिकतर बीजेपी उपचुनावों मे हार जाती है. उपचुनाव के आंकड़ों पर अगर निगाह डाली जाये तो पिछले चार सालों में पंद्रह लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, जिसमें से बीजेपी  को सिर्फ चार पर ही जीत नसीब हो पाई है, बाकी सीटों बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है.

आपको बता दें कि वर्ष 2014 में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला था. बीजेपी ने इसके बाद सरकार भी बनाई थी लेकिन उसके बाद 2014 में जिन किसी कारणों से देश भर में पांच लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए उसमें से सिर्फ दो सीटों पर ही बीजेपी को जीत मिल पाई बाकी तीन पर उसे हार का सामना करना पड़ा था.

ये है हार- जीत का आंकड़ा

-कंधामल, ओडिशा में बीजू जनता दल से करीब तीन लाख वोटों से बीजेपी  को हार का सामना करना पड़ा (2014)

-मेडक, तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्रीय समिति से करीब तीन लाख वोटों से बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. (2014)

-मैनपुरी, उत्तर प्रदेश में सपा से भी करीब तीन लाख वोटों से बीजेपी हार गई थी. (2014)

-महाराष्ट्र के बीड़ में सात लाख वोटों से बीजेपी जीती (2014)

-गुजरात के बड़ोदरा में सवा तीन लाख वोटों से बीजेपी जीती (2014)

-बनगांव, पश्चिम बंगाल में बीजेपी सवा दो लाख वोटों से हारी(2015)

-लखीमपुर, असम में बीजेपी चार हजार वोट से जीती(2016)

-शहडोल, मध्य प्रदेश में बीजेपी साठ हजार वोट से जीती(2016)

-तामलुक, पश्चिम बंगाल में छः लाख वोटों से बीजेपी  हारी (2016)

-कूच बिहार, पश्चिम बंगाल में चार लाख वोट से बीजेपी हारी(2016)

-तुरा. मेघालय उपचुनाव में बीजेपी ननें नहीं लिया था हिस्सा (2016)

-गुरदासपुर, पंजाब में बीजेपी कांग्रेस से लगभग दो लाख वोट से हारी(2017)

-झाबुआ, मध्य प्रदेश में बीजेपी लगभग नवासी हजार वोटों से हारी(2017)

-अलवर,राजस्थान में बीजेपी लगभग डेढ़ लाख से भी अधिक वोटों से हारी (2018)

-अजमेर, राजस्थान के उपचुनाव में बीजेपी कांग्रेस से लगभग चौरासी हजार वोटों से हारी (2018)

ये हैं हार के कारण:

राजनीतिक जानकार यह मानते हैं कि उपचुनाव लोकसभा का हो या विधानसभा का इस मौके पर जनता सरकार के बारे में सीधा फैसला लेने में सक्षम होती है. जनता यह भी देखती है कि जो पार्टी सत्ता में बैठी है उसने जो वादे किए थे उसमें से कितना पूरा किया है या कितना पूरा करने की कोशिश कर रही है. कुछ इसी तरह की वह बातें होती है जिसे ध्यान में रखकर जनता वोट करती है. दूसरा कारण यह है कि सत्तारूढ़ पार्टियां इन चुनाव में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त होती हैं इसलिए  ज्यादा ध्यान भी नहीं देती हैं.

 

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