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चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की ताकत मांगी

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नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने दोषी व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक दलों के गठन को रोकने से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा. आयोग ने अपने पक्ष को रखते हुए कहा कि उसके पास जिस तरह किसी दल के रजिस्ट्रेशन का अधिकार है वैसे ही किसी राजनीतिक दल के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की शक्ति भी होनी चाहिए.

यहाँ आपको बता दें कि वर्तमान में चुनाव आयोग के पास किसी पार्टी के पंजीकरण का अधिकार तो है लेकिन उसे रद्द करने का अधिकार नहीं है. इसके अलावा द रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट 1951 में किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने का कोई स्पष्ट प्रावधान भी नहीं है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से ये भी कहा कि हमारे देश में आंतरिक पार्टी लोकतंत्र बहुत जरूरी है. आयोग ने कहा कि मतदान पैनल को सशक्त बनाने के लिए विधायिका द्वारा कानून में संशोधन के बाद इसे उपयुक्त दिशानिर्देश तैयार करने में भी सक्षम होना चाहिए.

चुनाव आयोग ने कोर्ट का ध्यान उस फैसले की ओर भी खींचा जिसमें 2002 में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करने या पंजीकरण के समय चुनाव आयोग को दिए गए उपक्रम का उल्लंघन करने पर आयोग किसी पार्टी का पंजीकरण रद्द नहीं कर सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केवल तभी किसी पार्टी का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है जब धोखाधड़ी से उसका पंजीकरण करवाया गया हो या किसी अन्य कारण से पंजीकरण हुआ जिस पर चुनाव आयोग ने जांच न की हो.

चुनाव आयोग ने एडवोकेट अमित शर्मा द्वारा हलफनामा दायर करके एक याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा. इससे पहले एक और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर याचिका में मांग की थी कि चुनाव आयोग के पास आंतरिक पार्टी लोकतंत्र को सुनिश्चित करने की शक्ति होनी चाहिए.

20 साल से आयोग कर रहा है नियम में संशोधन की मांग

हलफनामे में  चुनाव आयोग ने इस बात पर खेद जताया है कि वह पिछले 20 सालों से इस अधिनियम में संशोधन के लिए केंद्र सरकार को लिख रहा है. लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

भारत के चुनाव आयोग को एक राजनीतिक दल को रद्द करने की शक्ति दी जानी चाहिए और इसके अलावा आयोग को इसके लिए भी अधिकृत होना चाहिए कि वो पंजीकरण करने और पंजीकरण रद्द करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सके.

इस याचिका पर आगे सोमवार को सुनवाई होने की उम्मीद है. केंद्र सरकार ने अभी तक इस याचिका पर अपना जवाब नहीं दिया है.

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