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क्या मौर्य-कुशवाहा नेताओं का ‘नया घर’ बनने जा रही है समाजवादी पार्टी ?

अखिलेश यादव को लगने लगा है कि उनके परंपरागत वोट बैंक के साथ अगर मौर्य-कुशवाहा वोटर जुड़ते हैं तो उनकी ताकत बढ़ जाएगी.

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अखिलेश यादव

नई दिल्ली: अब समाजवादी पार्टी की नजर उत्तर प्रदेश में मौर्य-कुशवाहा समाज के नेताओं पर है. समाजवादी पार्टी इस समय बीजेपी,बीएसपी व अन्य पार्टीयों के असंतुष्ट मौर्य-कुशवाहा नेताओं को तवज्जो दे रही है और पार्टी में शामिल करा रही है.

उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों बीजेपी, बीएसपी, और अन्य कई छोटे-बड़े दलों के मौर्य-कुशवाहा नेता अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं.

यूपी सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के भतीजे प्रमोद कुमार मौर्य ने भाजपा पर नेताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया उनके साथ अमेठी से बसपा के प्रत्याशी रहे रामजी उर्फ़ राहुल मौर्य, सत्यभान सिंह शाक्य, राजेंद्र कुमार मौर्य सहित दर्जनों नेता समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हो गये.

सपा की सदस्यता ग्रहण करने के दौरान अखिलेश यादव के साथ मौर्य -कुशवाहा समाज के नेता

केशव प्रसाद मौर्य के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद, कभी बसपा के काडर वोटर रहे मौर्य-कुशवाहा समाज का वोट 2017 के विधानसभा चुनाव बीजेपी में की तरफ ट्रांसफर हो गया था. जानकारी के अनुसार केशव प्रसाद मौर्य के मुख्यमंत्री ना बनने, स्वामी प्रसाद मौर्य को सरकार में कम तवज्जो दिए जाने और योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद के बीच वर्चस्व की लड़ाई की ख़बरें आने के बाद समाज के नेताओं का भाजपा से मोहभंग हो रहा है, जिसका फायदा अखिलेश यादव उठाना चाह रहें हैं.

अखिलेश यादव नें भाजपा और अन्य दलों के असंतुष्ट मौर्य- कुशवाहा नेताओं के लिए सपा के दरवाजे खोल दिए हैं. बीते चुनावों में इस समाज के लोगों का थोड़ा- बहुत समर्थन सपा को मिलता रहा है.

अखिलेश यादव के साथ मौर्य-कुशवाहा समाज के नेता

राजनीतिक जानकारों की माने तो अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव की हार से सीख लेते हुए बीजेपी की तर्ज पर अपनी पार्टी में सामाजिक समीकरणों को को दुरुस्त करने में लगे हुए हैं. अखिलेश यादव को लगने लगा है कि उनके परंपरागत वोट बैंक के साथ अगर मौर्य-कुशवाहा वोटर जुड़ते हैं तो उनकी ताकत बढ़ जाएगी. इसलिए वो संगठन में गैर यादव पिछड़ो को शामिल कराने पर जोर दे रहे हैं. अखिलेश यादव समझ गए हैं कि गैर-यादव पिछड़े वर्ग के लोगों को साथ जोड़े बिना यूपी की सत्ता पर काबिज नहीं हुआ जा सकता है.

अखिलेश यादव से कई नेताओं ने मुलाक़ात की

इस बारे में पूछने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और प्रवक्ता अविनाश कुशवाहा ने कहा कि “पिछड़ों की सबसे बड़ी दुश्मन बीजेपी है. बीजेपी शुरू से ही दलितों और पिछड़ों की विरोधी रही है. सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी ने पिछड़ों को एक मुखौटा दिखाया और पिछड़ों के साथ धोखा किया. योगी और मोदी की सरकार में पिछड़ों का हर तरफ से शोषण हो रहा है. उनका आरक्षण ख़त्म किया जा रहा है.”

अविनाश कहते हैं कि “भारतीय जनता पार्टी में पिछड़ों को सम्मान नहीं मिल रहा है उनकी उपेक्षा की जा रही है इसलिए लोगों को महसूस हो गया कि समाजवादी पार्टी ही किसानों, गरीबों और पिछड़ों की हितैषी पार्टी है, अखिलेश यादव जी की विकासवादी नीतियों में लोगों का भरोसा जाग रहा है, लोगों ने दोनों का कार्यकाल देख लिया, जनता दोनों के काम की तुलना कर रही है. यही वजह है कि सभी लोग अपना नेता मानते हुए अखिलेश जी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.”

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