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जमानत नहीं बची फिर भी क्यों खुश है कांग्रेस..?

उपचुनाव के इन नतीजों को कांग्रेस सियासत की नई शुरुआत के आधार के तौर पर देख रही है.

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फ़ाइल फोटो, राहुल गाँधी, कांग्रेस अध्यक्ष

नई दिल्ली: गोरखपुर और फूलपुर में कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है. दोनों ही जगह पार्टी के प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई. फूलपुर में तो निर्दलीय प्रत्याशी अतीक अहमद कांग्रेस पर भारी पड़े और उससे दोगुना वोट बटोर लिया लेकिन कांग्रेस अपनी जमानत जब्त होने से ज्यादा बीजेपी की हार का जश्न मना रही है.

 

 

अपनी जमानत जब्त होने के गम से ज्यादा कांग्रेस को इस बात की ख़ुशी है कि बीजेपी दोनों जगहों पर हार गई है. बीजेपी की हार को कांग्रेस खुद के लिए शुभ संकेत मान रही है, हालांकि गोरखपुर- फूलपुर लोकसभा उपचुनावों के परिणामों ने कांग्रेस की अकेले चलने की रणनीति को तगड़ा झटका दिया है.

 

 

ये है गोरखपुर और फूलपुर में कांग्रेस को मिले वोटों का आंकड़ा –

गोरखपुर में भी कांग्रेस का हाल बहुत बुरा रहा. गोरखपुर में कांग्रेस प्रत्याशी सुराहिता करीम ने 18858 वोट हासिल किए और वह तीसरे नंबर पर रहीं. यहां सपा और बीजेपी के वोटों का आंकड़ा 4 लाख से ज्यादा रहा.
फूलपुर में कांग्रेस के प्रत्याशी मनीष मिश्रा 19353 वोट ही हासिल कर पाए. जबकि निर्दलीय उम्मीदवार और बाहुबली नेता अतीक अहमद कांग्रेस से कहीं आगे रहे. अतीक अहमद इस चुनाव में 48094 वोट हासिल कर सपा, बीजेपी के बाद कांग्रेस से ऊपर तीसरे नंबर पर रहे.

 

 

क्यों खुश है कांग्रेस-

लगातार बीजेपी से पराजय झेल रही कांग्रेस को लग रहा है कि उपचुनाव में अगर सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों मिलकर लड़े होते बीजेपी को और करारी शिकस्त दी जा सकती थी. इसलिए उपचुनाव के इन नतीजों को कांग्रेस सियासत की नई शुरुआत के आधार के तौर पर देख रही है.

जिस तरह उत्तर प्रदेश में गठबंधन का नया प्रयोग सफल रहा और सपा-बसपा के जातीय समीकरण काम कर गए, उससे लगातार हार रही कांग्रेस में भी उत्साह आ गया है. उपचुनाव के नतीजों को देख कहीं ना कहीं कांग्रेस यह समझ गई है की अगर तीनों दल साथ मिलकर लड़ें तो बीजेपी को आसानी से हराया जा सकता है.

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