लॉक डाउन के फ़रिश्ते: मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस की संस्थापक आंचल शर्मा, देश के कई राज्यों में बांट रहीं हैं राहत सामग्री

इस संगठन की शुरुआत तीन साल पहले हुई थी. तबसे ‘मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस’ के बैनर तले आंचल शर्मा गरीब और बेसहारा लोगों को खाना खिलाने का काम करती रही हैं. ये संस्था लॉक डाउन से पहले दिल्ली के अन्दर रोज तकरीबन 500 लोगों को खाना खिलाती थी.

आंचल शर्मा

नई दिल्ली: देश भर में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन ने सबको अपने घरों में रहने को विवश कर दिया है. अधिकतर लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं. लॉक डाउन के कारण देश के गरीबों और दैनिक मजदूरी करने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. काम-काज ठप्प हो जाने से उनके सामने कई तरह के समस्याएं खड़ी हो गई हैं. लॉक डाउन से उपजे इन हालातों को देखते हुए कुछ समाजसेवी और संगठन ऐसे लोगों को तक राहत पहुंचाने का काम कर रहे हैं. ताकि किसी को भूखा न रहना पड़े. ऐसा ही एक संगठन है मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस जिसकी संस्थापक आंचल शर्मा हैं. मानवता को बचाने के लिए आंचल शर्मा की ओर से लगातार काम किया जा रहा है.

इस संगठन की शुरुआत तीन साल पहले हुई थी. तबसे ‘मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस’ के बैनर तले आंचल शर्मा गरीब और बेसहारा लोगों को खाना खिलाने का काम करती रही हैं. ये संस्था लॉक डाउन से पहले दिल्ली के अन्दर रोज तकरीबन 500 लोगों को खाना खिलाती थी.

लॉक डाउन की घोषणा के बाद उपजे हालातों को देखते हुए आंचल शर्मा ने जब जरुरतमंदों को राहत पहुंचाने का फैसला लिए तो पहले दिन दो हजार लोगों को खाने का पैकेट वितरित किया, दूसरे दिन पांच हजार, तीसरे दिन दस हजार लोगों में खाने का पैकेट वितरित किया. इसके बाद लगातार ये संख्या बढ़ती गई और दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में भी इस संस्था नें लोगों को राहत सामग्री और खाने का पैकेट बांटना शुरू कर दिया. जो अब तक जारी है.

फोटो- आंचल शर्मा

जियोपोस्ट से बातचीत करते हुई आंचल शर्मा ने कहा कि “अभी हमने स्क्रीनिंग सेंटर्स पर लोगों को मदद पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है, कहीं तीन हजार, कहीं चार हजार किट वितरित कर रहे हैं. इस किट में चार लड्डू, दो केले, एक बिस्किट का पैकेट और पानी की बोतल है.

उन्होंने बताया कि “हमने राशन वितरण का काम भी लगातार जारी रखा है. तकरीबन दस हजार लोगों को हम राशन वितरित कर चुके हैं. नई जगह पर जाकर राशन वितरण करने के बजाय हम ये कोशिश कर रहे हैं कि जिनकी मदद हम कर चुके हैं, उनको फिर से मदद पहुंचाएं ताकि उन्हें अपने घरों से बाहर न निकलना पड़े और वे संक्रमण से बचे रहें. हमारी कोशिश है कि जब तक लॉक डाउन चलेगा, तब तक हम ऐसे लोगों तक हर हफ्ते राशन पहुचाते रहें, ताकि उन्हें सड़कों पर न निकलना पड़े.”

उन्होंने बताया कि जिनके परिवार बड़े हैं उन्हें दस दिन का राशन दिया जा रहा है, और जिनके छोटे हैं उन्हें एक हफ्ते का. राशन किट में पांच किलो आटा, पांच किलो चावल, दो किलो दाल, तेल की बोतल, मिर्च, नमक, हल्दी होती है. बिहार में भी राशन वितरण हो रहा है, वहां लगभग दो हजार लोगों को राशन वितरित किया जा चुका है. बिहार में राशन किट के साथ आलू और प्याज भी वितरित किया जा रहा है.

मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस की संस्थापक आंचल शर्मा ने बताया कि अभी भी मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस की पांच गाड़ियाँ सड़कों पर हैं, जो प्रवासी मजदूरों और अन्य जरुरतमंदों को केला, मिठाई, बिस्किट और पानी के बोतल की किट बनाकर वितरित कर रही है. दिल्ली के अलावा बिहार, कश्मीर, हरियाणा, सहित कई राज्यों में जरुरतमंदों को राहत सामग्री वितरित की जा रही है.

महामारी के इस दौर में मानवता की रक्षा के लिए जो काम आंचल शर्मा और उनकी संस्था मिल्स ऑफ़ हैप्पीनेस कर रही है. उसके लिए उन्हें जियोपोस्ट सलाम करता है.